घर आ गया

सोचा नहीं था, इस भाषा में दोबारा उतर पाऊँगा। मगर, अगर सोचा गया ही होने लगे तो ना रंज रहेगा, ना रस। रंज का वियोग सहनीय है, रस का नही। बहरहाल, पता नहीं कहाँ जा रहा हूँ, बिना सोचे समझे एक रास्ते पर पैर रख दिए हैं, चल भी पड़ा हूँ। साफ़ कुछ दिखाई नहीं देता पर मौसम सुहाना है। कुछ समय तो ज़रूर बिताऊंगा। वही समय जिसने “मेरी भाषा” को “इस भाषा” कर दिया।

अतिशोय्क्ति तो लगेगी, हर कोई यही कहता है- नानी का घर, बरगद का पेड़, पुरानी पतली गली। लेकिन मुझे भी यही सब कुछ याद आता है। वही नानी का घर, गोबर से लीपे हुए फर्श, चटाई, ताश, मामा का डर, वापस घर जाने का उत्साह, वापस जाते वक़्त नानी के दिए हुए पैसे। यही सब क्यों याद आता है? क्योंकि अपना है। हिंदी भी तो अपनी ही है। जाने ये कब हुआ पर आजकल नानी के घर जाना नहीं होता । बहुत दिन हो गये।

फिर वही समय। जैसे ही विराम आता है, समय को ढूंढने लगता हूँ। किसी पर तो दोष डालना है ना। डाल किसी पर भी दूँ, आईना तो रोज देखा ही जाता है। नहीं, रोज नहीं, शायद आज कई सालो बाद देखा है। अपराधबोध सा हुआ देखकर। जाने क्यों!

किसी पश्चाताप के चलते कोई संकल्प नहीं लेने वाला हूँ। बस लिख रहा हूँ जिससे लिखा हुआ आँखों के सामने रहे, आते जाते देख पाऊँ, पढ़ पाऊँ, याद रख पाऊँ कि कुछ ऐसा भी मौजूद है, प्रचलित है, बरकरार है। और ऐसा जो पसंद भी है। हमेशा था। शायद धूमिल हो गया था। पर हमेशा था। वैसे ही था जैसे वो शहर जिसमे बचपन बिताया था, वो लड़ाई जो बहनो से की थी और जिसे याद करके कभी भी मन उदास हो जाता है, वो क्षण जिसमें पहली बार लगा था कि माँ बाप शायद जिम्मेदारी उठाने लायक समझने लगे हैं, वो हर बात जो दोस्तों से बेहिचक कह दी जाती है, और वो सब पुराने गीतों सा, जो आज भी गुनगुनाये जाते हैं। हिंदी भी थी। और अब शायद हमेशा रहेगी। शायद।

घर आ गया। मन नहीं भरा। सड़क छोटी थी। वो सड़क भी घर ही सी प्रतीत होती थी वैसे। खैर, उस सड़क से जुड़ते हुए कई रास्ते देख आया हूँ। बस जब दोबारा जाऊं तो वहाँ कुछ लोग मिल जाएँ तो मज़ा आ जाये…

Advertisements

What do you think?

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s